खाना खाने का सही समय क्या होना चाहिए

आयुवेदा के अनुसार में कहा गया है भोजन के समय के विषय में कहा गया है कि जब मल-मूत्र ठीक प्रकार से त्यागा जा चुका हो जब मन शांत हो, पांचो तत्व संतुलित हों, पेट में वायु न् हो, शरीर हल्का फुल्का लगे, अभीज्ञान् ईन्द्रिय – सम्बंधी अंग ठीक तरह काम कर रहे हों, भुक हो तभी भोजन लिया जाना चाहिए

खाना खाने का सही समय

सुबह 11 से 1 तक खाना चाहिए ।

और रात को 7 ते 8:30 तक खाना चाहिए। खाने के बाद तुरंत पाणी नहीं पिए पचने के लिए थोड़ा टाइम दे 20 मिनिट के बाद पानी पीना चाहिए। भोजन हमेशा धीरे धीरे अच्छी तरह चबाकर खाइए।

भोजन समय पर और अपनी पाचन -शक्ति और क्षमता को रखकर ही करे.

भोजन से पहले हाथ ,मुंह, पांव भली प्रकार धोएं आंखों पर ठंडा जल के छींटे मारे. इससे आपकी थकान दूर होती लगेगी और शरीर ताजा और हल्का लगेगा

यदि संभव हो तो जमीन पर चौकड़ी लगाकर पाटे पर भोजन करें. इससे भोजन पेट में सुविधा पहुंचने में सहायता मिलती है.

एक बार खाने वाला योगी, दो बार खाने वाला भोगी और तीन बार खाने वाला रोगी होता है.’ यह कहावत सुनने में कुछ अटपटी लग सकती है, भोजन को भली प्रकार चबा-चबाकर खाए, भोजन को गले निगले नही. जल्दी-जल्दी भोजन करने और चबाकर न् खाने से भोजन कणो में विभक्ति नही हो पाता. वहः अधकचरी अवरथा में पेट में चला जाता है, जहां उसे तरल करने में पेट को कड़ा परीश्नम करना पड़ता है जो काम दांतो को करना होता है, वह आंतो को और पेट को करना पड़ता है और समस्त पाचन की क्रिया अस्त-व्यस्त हो जाती हैं.

जब भी आप जल्दी में हों , तनाव की स्थिती मे हों, मन अशांत होगा. किसी प्रकार की समस्या से ग्रस्त हों, मन अशांत हो, क्रोध आ रहा हो, ऐसी अवरथा में जो भी भोजन किया जाएगा वहः जहर बन जाएगा. इसका कारण है कि किसी भी प्रकार का तनाव होने पर शरीर की अंत:स्त्रावी ग्रंथियो पर कुप्रभाव पड़ता है और उनसे जो स्त्राव होता है उनकी क्रिया में बाधा उत्पन्न हो जाती है. शरीर पूरा नाड़ी तंत्र तनाव ग्रस्त हो जाता है. अत: तसल्ली से, शांत मन से भोजन करे